बेनीबाद गाँव
बागमती की लहरों संग, हँसता बेनीबाद,
मिट्टी में खुशबू बसी, सादा-सा संवाद।
खेतों में लहराती फसल, सूरज का उपहार,
मेहनत की इस धरती पर, सपनों की भरमार।
ओ बेनीबाद, मेरा गाँव, दिल की पहचान,
तेरी गलियों में बसता है, अपनापन महान।
पीपल की छाँव तले, किस्सों की है शाम,
चूल्हों की आँच में पकता, प्यार भरा हर काम।
माँ की बोली, बाबूजी की सीख,
इन्हीं बातों से तो बनती, जीवन की रीत।
ओ बेनीबाद, मेरा गाँव, सुकून की सौगात,
तेरे नाम से जुड़ी है, हर मीठी सी बात।
मेले की रौनक, ढोलक की तान,
त्योहारों में झूम उठे, हर एक इंसान।
दूर शहर बुलाएँ चाहे, चकाचौंध के साथ,
लौट के दिल कहे हमेशा—यहीं है मेरी बात।
ओ बेनीबाद, मेरा गाँव, मेरी जड़, मेरी शान,
जहाँ से शुरू हुई मेरी राह, वहीं है मेरा मान।